
दि. 14 नई दिल्ली | सतीश वागरे: संवाददाता ———– — सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किए जाने के बाद देश में सियासत गर्मा गई है। पूर्व सांसद और दलित नेता डॉ. उदित राज ने भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की इस याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए इसे आरक्षण को खत्म करने की एक गहरी साजिश करार दिया है।”आरक्षण आर्थिक नहीं, प्रतिनिधित्व का मामला”डॉ. उदित राज ने कड़े शब्दों में कहा कि, “आरक्षण गरीबी हटाओ कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन वर्गों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का जरिया है, जिन्हें सदियों तक हाशिए पर रखा गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि, भाजपा से जुड़े लोग बार-बार ऐसी याचिकाएं लगाकर दलितों और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला कर रहे हैं।डॉ. उदित राज का तर्क है कि एससी/एसटी वर्ग में अभी भी छुआछूत और सामाजिक भेदभाव मौजूद है, जिसे केवल आर्थिक आधार (क्रीमी लेयर) से नहीं मापा जा सकता।उन्होंने कहा कि,
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल यह याचिका सरकार की शह पर है ताकि पिछड़े वर्गों को आपस में लड़ाया जा सके।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है, जिससे यह मुद्दा दोबारा चर्चा में आ गया है।”जब तक समाज में जातिगत भेदभाव खत्म नहीं होता, तब तक क्रीमी लेयर की बात करना बेईमानी है। हम सड़क से संसद तक इस भेदभावपूर्ण सोच का मुकाबला करेंगे।”बता दें कि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में दलील दी है कि, एससी/एसटी वर्ग के संपन्न परिवारों (क्रीमी लेयर) को आरक्षण से बाहर किया जाना चाहिए ताकि इसका लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में गरीब हैं। इसी बात को डॉ. उदित राज ‘आरक्षण की आत्मा’ पर प्रहार बता रहे हैं।
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