
दि.11 नई दिल्ली (उपसंपादक: सतीश वागरे) —-————— देश की न्यायिक और सामाजिक व्यवस्था में बहुजन समाज (दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक, आदिवासी) की सत्ता और प्रतिनिधित्व को केंद्र में लाने के लिए एक बड़ा और धारदार राजनीतिक-सामाजिक मंच तैयार हो रहा है। ‘डोमा परिसंघ’ के बैनर तले 15 जनवरी, 2026 को दिल्ली में होने वाले ‘बहुजन संवाद’ की कमान प्रखर बहुजन नेता डॉ. उदित राज संभालेंगे। यह आयोजन हाल ही में घोषित बार काउंसिल चुनावों को लेकर है, जहां पहली बार महिला आरक्षण लागू होना एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत माना जा रहा है।इस चुनावी घोषणा को बहुजन समाज, खासकर महिलाओं, के लिए एक ऐतिहासिक ‘प्रवेश द्वार’ बताते हुए डॉ. उदित राज के नेतृत्व में यह संवाद कानूनी अधिकारों से लेकर राजनीतिक रणनीति तक पर केंद्रित होगा। मकसद साफ है, कानून की दुनिया में दबंग सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देकर बहुजन विशेषकर महिला वकीलों की भागीदारी सुनिश्चित करना। यह सिर्फ चुनावी चर्चा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए एक सामाजिक-राजनीतिक पहलकदमी है।मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैथ और विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम की मौजूदगी इस आयोजन को और भारतीय देंगी।

उम्मीद है कि, देशभर के सैकड़ों बहुजन वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी इस ‘जुटान’ में हिस्सा लेंगे।आयोजन का स्वरूप गुरुवार,15 जनवरी, 2026 को समय दोपहर 3 बजे वाईएमसीए ऑडिटोरियम, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली में सपन्न होगा Iडॉ. उदित राज के नेतृत्व में यह ‘बहुजन संवाद’ एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देता नज़र आ रहा हैI “न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व का अभाव सामाजिक न्याय का अभाव है। बार काउंसिल का मैदान अब पुराने ढर्रे से बाहर निकलेगा।” ऐसे में यह आयोजन सिर्फ एक चर्चा नहीं, बल्कि आगामी चुनावी लड़ाई के लिए एक रणनीतिक कमांड समिट साबित हो सकता है।