
“चुनावी रण छोड़, दुख में हाथ बढ़ाया: विरोधी के घर मौत पर पहुंचे पूर्व प्रतिद्वंद्वी, राजनीति में संवेदना की नई मिसाल”
दि. 11 वार्ता (संपादक :सचिन कमल पटेल) —————— मध्य प्रदेश के राजपुर विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसी घटना ने राजनीति के पार मानवीय रिश्तों की ताकत को साबित कर दिया है। विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ जीत की जंग लड़ने वाले दो नेताओं के बीच दुख की घड़ी में जो एकजुटता देखने को मिली, वह आज के दौर की कटु राजनीति के लिए एक सबक बन गई है। काँग्रेस पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी के असामयिक निधन के बाद उनके परिवार के दुख में साथ देने पहुंचे व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी और भाजपा नेता अंतर सिंह पटेल थे। पटेल ने अपनी पार्टी के जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं के साथ शोकसभा में शामिल होकर न केवल संवेदना व्यक्त की, बल्कि यह साबित किया कि, नीतियों का मतभेद व्यक्तिगत संबंधों पर भारी नहीं पड़ना चाहिए।

चुनावी मैदान की प्रतिद्वंद्विता, जीवन के मैदान में सहयोग राजपुर में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बाला बच्चन और अंतर सिंह पटेल आमने-सामने थे। लेकिन जीत-हार से ऊपर उठकर पटेल ने मानवीय संबंधों की मिसाल पेश की। उनके इस कदम को क्षेत्र की जनता और राजनीतिक हलकों में व्यापक सराहना मिल रही है। भाजपा नेता पटेल ने कहा कि “चुनावी लड़ाई राजनीति का हिस्सा है, लेकिन इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।

” उनके इस व्यवहार ने राजनीति में सत्ता की दौड़ से ऊपर उठकर संवेदनशीलता और भाईचारे का संदेश दिया है।आज के दौर में जब राजनीति अक्सर व्यक्तिगत विवादों और कटुता का पर्याय बनती जा रही है, राजपुर की यह घटना एक नई रोशनी दिखाती है। यह साबित करती है कि मतभेद होने के बावजूद इंसानी रिश्तों और सम्मान को कायम रखा जा सकता है।

राजपुर की इस घटना ने सिद्ध किया है कि राजनीति की सीमाएं इंसानी संवेदनाओं के आगे बौनी हैं। अंतर सिंह पटेल और उनके साथियों का यह कदम न केवल उनके बड़प्पन को दर्शाता है, बल्कि पूरे राजनीतिक समुदाय के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करता है। सच्ची लोकनीति वही है जहाँ जनता के सुख-दुख में नेता साथ खड़े दिखें, चाहे वे सत्ता में हों या विपक्ष में।