
नई दिल्ली | २४ दिसंबर 2025 (उपसंपादक:सतीश वागरे) देश में बौद्ध परंपरा को संरक्षित करने और बौद्ध समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से धम्म पथ संघ द्वारा 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संघ ने पूरे देश में बौद्ध समाज को एक करने की प्रतिज्ञा लेते हुए यह संदेश दिया कि भारत बहुत जल्द एक बड़े सांस्कृतिक परिवर्तन की ओर अग्रसर होगा।

कार्यक्रम में समता मूलक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रताप सिंह अहिरवार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समता मूलक संघ इस अभियान के साथ 24 घंटे मजबूती से खड़ा रहेगा और देश को बौद्ध मूल्यों की ओर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

प्रताप सिंह अहिरवार ने बौद्ध समाज से अपील करते हुए कहा कि,“इस देश में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग अपनी पहचान बौद्ध धर्म से करें, न कि जातियों से। जो लोग बौद्ध हो चुके हैं, वे जाति का उल्लेख कर मनुवादी व्यवस्था को मजबूत करने का काम न करें।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, बौद्ध धर्म शांति का मार्ग है, लेकिन यदि इस शांति के मार्ग में कोई अशांति फैलाने का प्रयास करेगा, तो उसका विरोध करने से पीछे नहीं हटा जाएगा।“हम शांति में विश्वास रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो सम्राट अशोक की तलवार उठाने से भी परहेज नहीं करेंगे। देश और संस्कृति की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा,” ऐसा उन्होंने दृढ़ शब्दों में कहा।

इस कार्यक्रम में राजेश जाटव जी, बहादुर सिंह, गौरव लाडला सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन धम्म पथ संघ द्वारा किया गया। धम्म पथ संघ के संस्थापक जय भीम प्रकाश जी ने कहा कि, यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश में बौद्ध चेतना को पुनर्जीवित करने और सामाजिक समता, करुणा एवं बंधुत्व के मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि बौद्ध समाज अब अपनी सांस्कृतिक पहचान और एकता के लिए संगठित होकर आगे बढ़ने को तैयार है।