राहुल गांधी ने ‘Run for Ambedkar’ में संविधानिक संदेश दिया; क्या इस रैली से बदलेगी सामाजिक समता?

नई दिल्ली,12 अप्रैल, (उपसंपादक: सतीश वागरे) आज दिल्ली में “Run for Ambedkar, Run for Constitution” मैराथन को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने एक सशक्त संवैधानिक संदेश देते हुए कहा कि, संविधान हमारी एकमात्र पहचान है, और इसकी रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। राहुल गांधी ने कहा, “ डॉ. बाबा साहेब ने जो संविधान दिया, वह सिर्फ कानून की किताब नहीं, बल्कि समानता, न्याय और बंधुत्व की जीवंत आत्मा है। आज संविधान पर हमला हो रहा है, ऐसे में हमें सड़कों पर उतरकर इसकी रक्षा की शपथ लेनी होगी”वास्तविकता यह है कि, एक दौड़ से व्यवस्थागत भेदभाव, जातिगत हिंसा या आरक्षण की चोरी रातों-रात नहीं रुकेगी। लेकिन इस रैली का सबसे बड़ा योगदान जन-जागरण है। जब हजारों युवा संविधान के नाम पर दौड़ते हैं, तो वैचारिक बदलाव की नींव पड़ती है। यह रैली यह संदेश देती है कि समता के लिए संघर्ष जारी रहेगा, चाहे सत्ता कोई भी हो।

डॉ. उदित राज, कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “यह रैली मात्र राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। यह उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है जिन्हें संविधान ने आज़ादी दी। सामाजिक समता में वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब संविधान का हर अनुच्छेद धरती पर उतरे। ”एक रैली से समता नहीं बदलती, लेकिन यह रैली बदलाव की शुरुआत ज़रूर है। जब तक आम आदमी अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग नहीं होगा, तब तक सामाजिक समता सिर्फ किताबों में रहेगी। ‘Run for Ambedkar’ उसी सजगता का अभियान है।

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