
दि. १२ गिर सोमनाथ, गुजरात (विशेष प्रतिनिधी) गिर सोमनाथ की विधानसभा सीट से इन दिनों जो खबर आ रही है, वो चुनावी माहौल में आग की तरह फैल रही है। कहा जा रहा है कि मतदाता सूची से करीब 15 हजार वोटरों के नाम हटाने की कोशिश हुई है। अब जब इतने सारे लोगों का नाम कटने की बात सामने आई, तो लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर ये हो क्या रहा है? दरअसल, हाल ही में वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए अर्जियां डाली गईं। जब आम लोगों ने अपनी-अपनी लिस्ट देखी, तो पाया कि उनका नाम ही गायब है। सबसे बड़ी बात ये कि जिन लोगों के नाम काटे गए, वो सालों से वोट डालते आ रहे थे। उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई, कोई नोटिस नहीं भेजा गया। बस एकदम से नाम उड़ा दिया गया। यहाँ सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर 15 हजार नाम कटवाने के लिए इतने सारे आवेदन किसने डाले? रिपोर्ट्स बता रही हैं कि बहुत कम लोगों ने मिलकर सैकड़ों-हजारों नाम कटवाने के लिए एक साथ अर्जियाँ ठूंस दीं। अब ये तो साफ है कि कोई आम आदमी अकेले-अकेले दूसरे के हजारों नाम कटवाने नहीं जाता। इसलिए शक की सुई सीधे प्रशासनिक मिलीभगत की तरफ घूम गई है।सोमनाथ की सीट पहले से ही गरमा रही है। पिछली बार यहाँ कांटे की टक्कर थी। ऐसे में 15 हजार वोट किसी भी पार्टी की जीत-हार का फैसला कर सकते हैं। यही वजह है कि विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि अगर इस तरह से वोटर लिस्ट से खिलवाड़ होता रहा, तो लोकतंत्र का गला घोंटना है। वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे साधारण प्रशासनिक कार्रवाई बता रहा है और कह रहा है कि ये तो बस राजनीति है।

अधिकारियों का कहना है कि ये तो रोज का काम है। जो लोग मर चुके हैं, दूसरी जगह बस गए हैं या जिनके नाम डुप्लीकेट हैं, उन्हें हटाना ही पड़ता है। लेकिन जनता का कहना है कि हम तो जिंदा हैं और यहीं रहते हैं, फिर हमारा नाम क्यों काटा गया? प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच कराई जा रही है और अगर किसी का नाम गलती से हटा है, तो उसे फिर से जोड़ा जाएगा।आम वोटरों में गुस्सा है। लोग कह रहे हैं- “हम सालों से वोट डाल रहे, बिना बताए नाम कैसे काट दिया?” सामाजिक संगठन भी मैदान में उतर आए हैं। उनकी मांग है कि जिनका नाम काटा गया, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। अभी पूरा मामला जांच के घेरे में है। देखना ये है कि चुनाव आयोग और प्रशासन कितनी ईमानदारी से इस केस को हैंडल करता है। लेकिन इतना तो तय है कि जब तक 15 हजार वोटरों की किस्मत साफ नहीं हो जाती, सोमनाथ की सियासत में ये मुद्दा ठंडा नहीं पड़ने वाला।