
बड़वानी, १५ जुलाई : (संपादक मध्यप्रदेश:सचिन कमल पटेल) मात्र सत्रह माह की छोटी सी तनवी, जो गाँव आली (कुक्षी) में रहती है, ८ जुलाई को जानलेवा हालत में जिला चिकित्सालय लाई गई। बुखार, उल्टी और खाँसी के साथ उसकी साँसें लगभग थम चुकी थीं। कुक्षी के सिविल चिकित्सालय से श्वास नलिका और कृत्रिम श्वसन थैली के सहारे उसे रेफर किया गया, हर पल मौत से जंग चल रही थी।जैसे ही वह शिशु गहन चिकित्सा कक्ष पहुँची, डॉक्टर पुष्पेन्द्र सतपुड़ा, डॉक्टर अमीचंद चौहान और उनकी नर्सिंग टीम ने बिना देरी के उसे यांत्रिक श्वसन यंत्र से जोड़ा।

जाँच रिपोर्ट में निमोनिया व गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई। दो दिनों तक श्वसन यंत्र का सहारा मिला, फिर धीरे-धीरे बच्ची ने संघर्ष करते हुए करवट बदली, चिकित्सकों की मेहनत रंग लाई और उसे श्वसन यंत्र से मुक्त कर दिया गया। पूरे छह दिनों तक दिन-रात नर्सिंग अधिकारियों की सतर्क निगरानी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज खन्ना के निर्देशन में तनवी का इलाज चला।

१४ जुलाई को वह पूर्णतः स्वस्थ होकर गोद में खिलखिलाती हुई घर लौटी। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जिला चिकित्सालय बड़वानी का शिशु गहन चिकित्सा कक्ष केवल एक वार्ड नहीं, बल्कि मासूम बच्चों के लिए जीवनदायिनी आशा का केंद्र है। चिकित्सकों की त्वरित सूझ-बूझ, नर्सों के अथक प्रयास और पूरी टीम के एकजुट होने का ही कमाल था कि एक नन्ही सी जान को नई सुबह मिल पाई।